जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई, उसे लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब सामने आया है कि जिस कंपनी को क्रूज संचालन और कर्मचारियों की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा गया था, उसका इस क्षेत्र में कोई पूर्व अनुभव नहीं था। हैरानी की बात यह है कि संबंधित कंपनी का मुख्य कार्य गेहूं की क्वालिटी जांचना बताया जा रहा है।
हादसे के बाद पर्यटन निगम की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 10 मई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग गठित किया गया है, जो हादसे के सभी पहलुओं की जांच करेगा।

आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे था पूरा संचालन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश पर्यटन निगम ने बरगी डैम स्थित क्रूज संचालन के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति सीधे करने के बजाय आउटसोर्स व्यवस्था अपनाई थी। केवल क्रूज संचालन ही नहीं, बल्कि बोट क्लब और रिसॉर्ट से जुड़े कई अन्य पदों—जैसे चपरासी, सुरक्षाकर्मी, कार्यालय कर्मचारी, बावर्ची और वेटर्स—पर भी आउटसोर्स कर्मचारी तैनात थे।
इस व्यवस्था ने अब पर्यटन स्थल की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
गेहूं की क्वालिटी जांच करने वाली कंपनी को मिला ठेका
जानकारी के मुताबिक, कर्मचारियों को उपलब्ध कराने वाली कंपनी आरबी एसोसिएट है, जिसका मुख्य व्यवसाय कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। कंपनी गेहूं की गुणवत्ता जांचने का काम करती है और इसकी स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी के पास क्रूज संचालन या पर्यटन सेवाओं का कोई विशेष अनुभव नहीं था।
इसके बावजूद कंपनी को बरगी डैम जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिसे अब हादसे की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
सरकार ने की कार्रवाई, जांच जारी
हादसे के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए क्रूज चला रहे पायलट महेश और उसके सहायक की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, जांच आयोग से अपेक्षा की जा रही है कि वह यह स्पष्ट करेगा कि बिना अनुभव वाली कंपनी को ठेका कैसे मिला और सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई।
बरगी डैम हादसे ने एक बार फिर सरकारी संस्थाओं में आउटसोर्सिंग व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं।




